मध्यमग्रहः वास्तविको नास्ति। ग्रहगतेः वैलक्षण्यात् तं साधयितुमानुपातिकः ग्रहः यः साध्यते सैव मध्यमः। वास्तविकः तत्परितः मन्दनीचोच्चे अन्त्यफलज्यान्तरे भवति। ताराग्रहाणां विषये स्पष्टग्रहः तस्मान्मन्दप्रतिवृत्तस्थग्रहादपि शीघ्रान्त्यफलज्यान्तरे परिभ्रमति। मध्यमग्रहस्थाने स्पष्टो भवति चेत् फलसंस्कारस्यैवावश्यकता न भवति। सादरम्।
Surya Siddhanta in Hindi
Saturday, October 3, 2020
Friday, October 2, 2020
शरीर की बारह राशि , सप्त धातु के ग्रह , एवं वनस्पति के अंशों के ग्रहों का विवरण किस ग्रंथ में प्राप्त होगा ?
प्रायः फलित ज्योतिष के सभी ग्रन्थ संज्ञाध्याय से प्रारम्भ होते है। इसी संज्ञाध्याय में राशियों के आधार पर शरीर का विभाजन बताया गया है। बृहज्जातक तथा लघुजातक के संज्ञाध्याय में इस अंश को देखा जा सकता है।
अस्थि मज्जा मांस मेद आदि धातुओं का ग्रह कारकत्व व ग्रहों का प्रतिनिधित्व भी संज्ञाध्याय में वर्णित है। उपरोक्त दोनों ग्रन्थों में यह अंश पाया जाता है।
वनस्पति के अंश अनेक प्रकार से वर्णित है। ग्रह वृक्ष के किस भाग का प्रतिनिधित्व करते है यह बात बृहज्जातक या लघुजातक में प्राप्त नहीं है। किन्तु वृक्षायुर्वेदाध्याय में तथा बृहद्वास्तुमाला में यह अंश पाया जाता है।
फलदीपिका का दूसरा अध्याय ग्रह भेदाध्याय के नाम से है। इस में 37 वां श्लोक ग्रहों के वृक्ष के विभिन्न अंशो से सम्बन्धित प्रातिनिध्य का वर्णन किया गया है।
मध्यमग्रहवृत्तॆ एव विद्यमानः स्पष्टग्रहः किं मन्दनीचोच्चवृत्तात् साध्यते, अथवा, स्पष्टग्रहः वास्तविकतया मन्दनीचोच्चवृत्ते विद्यते?
मध्यमग्रहः वास्तविको नास्ति। ग्रहगतेः वैलक्षण्यात् तं साधयितुमानुपातिकः ग्रहः यः साध्यते सैव मध्यमः। वास्तविकः तत्परितः मन्दनीचोच्चे अन्त्य...
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प्रायः फलित ज्योतिष के सभी ग्रन्थ संज्ञाध्याय से प्रारम्भ होते है। इसी संज्ञाध्याय में राशियों के आधार पर शरीर का विभाजन बताया गया है। बृह...
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मध्यमग्रहः वास्तविको नास्ति। ग्रहगतेः वैलक्षण्यात् तं साधयितुमानुपातिकः ग्रहः यः साध्यते सैव मध्यमः। वास्तविकः तत्परितः मन्दनीचोच्चे अन्त्य...